Tuesday, 18 August 2026

बारिश


​बारिश तो देखी ही होगी आपने...
कभी रिमझिम, तो कभी मूसलाधार!
​मानसून की बारिश,
शीत की बारिश,
और बेमौसम बारिश...
​लगातार बारिश से नदियों में बाढ़ आ जाती है,
बह जाते हैं लोग, पेड़-पौधे, फसलें और घर-द्वार।
​पर क्या आपने देखी है किसी के भीतर की बारिश...?
​भीतर की बारिश से
सारा तन-मन भीग जाता है,
ढह जाती हैं अहम की दीवारें,
टूट-टूट कर बह जाती हैं बंदिशों की चट्टानें।
​मौसम विज्ञानी अनुमान लगा सकते हैं उस बारिश का,
पर इस बारिश का केवल अहसास ही होता है।
​यह बारिश है हर मौसम की,
यह सुहाती है रिमझिम भी, मूसलाधार भी...
​जितनी ज़रूरी होती है वह बारिश—
खेतों के लिए, पीने के लिए, जीने के लिए,
उतनी ही ज़रूरी है यह बारिश—
आदमी को 'आदमी' होने के लिए...!

​-- नरेन्द्र कुमार कुलमित्र
02.03.23
9755852479

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