जो हो रहा है उसे देखना ज़रूरी है,
और देखे हुए को लिखना ज़रूरी है।
खाली बैठे रहने से कुछ नहीं होगा,
ज़िंदगी में हुनर सीखना ज़रूरी है।
पैसे खर्च कर लो जितना भी चाहे,
थोड़ा पानी बचाकर रखना ज़रूरी है।
चाहे जितना उड़ लो आसमान पर,
फिर धरती की ओर देखना ज़रूरी है।
प्रतिशोध में जुल्म तो ढाए ही जाएंगे,
फिर भी प्रतिरोध में लिखना ज़रूरी है।
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