Narendra Kumar Kulmitra
Thursday, 20 August 2026
तुम ज़रूरी हो-- 13.12.23
तुम ज़रूरी हो--
13.12.23
तुम हवा नहीं हो,
पर हवा की तरह ज़रूरी हो।
तुम पानी भी नहीं हो,
पर पानी की तरह ज़रूरी हो।
तुम आग, मिट्टी और आसमान भी तो नहीं हो,
पर आग, मिट्टी और आसमान की तरह ज़रूरी हो।
मेरी देह के लिए प्राण हो,
हाँ,
तुम ज़रूरी हो...
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