Wednesday, 19 August 2026

उदास क्षणों में 04.07.23

उदास होता हूँ
तो सोचता हूँ कि उदासी कब जाएगी?
​पर हर बार उदासी से उबरने के बाद ही
समझ पाता हूँ उदासी का महत्त्व।
​उदास क्षणों में ही
लगातार पनपते हैं
तरह-तरह के नए विचार।
​सच है, उदासी में ही विचार पकते हैं,
खरे बनते हैं।
​उमंग के क्षणों में विचार आते ही नहीं,
आते भी हैं, तो बहुत बौने होते हैं।
​बौने विचारों से व्यक्तित्व भी बौना हो जाता है,
व्यक्ति को विचारवान बनाती है उदासी...
​मैं आभारी हूँ अपने तमाम उदास क्षणों का,
जिन्होंने मुझे कसा है, पकाया है, बनाया है।
​उदासी के बाद
बिल्कुल नया हो जाता है व्यक्तित्व।
​हालाँकि मैं कभी उदास नहीं होना चाहता,
पर उदास होने पर
अपनी उदासी को कभी कोसता भी नहीं...!!

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