Narendra Kumar Kulmitra
Wednesday, 19 August 2026
नफरत और प्रेम 07.09.23
नफ़रत
रात के सघन अंधेरे की तरह होती है,
जिसके होने से कुछ भी देखा नहीं जा सकता!
प्रेम
दिन के उजाले की तरह होता है,
जिसके होने से सब कुछ आर-पार देखा जा सकता है!!
– नरेंद्र कुमार कुलमित्र
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