जैसे अनगिनत शब्दों के कहे जाने पर भी
अव्यक्त रह जाती हैं बहुत-सी बातें।
तुम रह जाना मेरे भीतर—
जैसे किसी के सशरीर चले जाने के बाद भी
मानस-पटल पर अंकित रह जाती है उसकी आकृति।
तुम रह जाना मेरे भीतर—
जैसे असहनीय दर्द का पल गुज़र जाने पर भी
ज़ेहन में बची रह जाती है एक हल्की-सी टीस।
तुम रह जाना मेरे भीतर—
जैसे समय के बीत जाने के बाद भी
हृदय में बनी रह जाती है अतीत की छाप।
तुम रह जाना मेरे भीतर—
जैसे सब कुछ भूल जाने के बाद भी
स्मृतियों में शेष रह जाते हैं कुछ धुंधले से पन्ने।
तुम रह जाना मेरे भीतर—
जैसे सारे काम निपटा लेने पर भी
अधूरे ही बचे रह जाते हैं कुछ काम।
तुम रह जाना मेरे भीतर—
जैसे सब कुछ पा लेने के बाद भी
शेष रह जाती है कुछ और पा लेने की लालसा।
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