Thursday, 20 August 2026

आवाज़ें 19.12.26

जब हम जोर जोर से बोलते हैं,
तो अपनी आवाज़ के सिवा
कुछ भी सुनाई नहीं देता।

और जब हम
एकदम चुप हो जाते हैं,
तब चुप्पियों से भी
सुनाई देने लगती हैं
फूटती हुई आवाज़ें...

दुःख भोगे थे 25.12.23

दुःख भोगे थे,
इसीलिए मैंने जाना सुख।
अगर पतझड़ न आते,
तो कैसे आता वसंत?

सवाल किया जाए 14.12.23

सवाल किया जाए,
सवालों की बारिश होगी,
तभी समाधानों के
अंकुर फूटेंगे।

तुम ज़रूरी हो-- 13.12.23

तुम ज़रूरी हो-- 13.12.23

तुम हवा नहीं हो,
पर हवा की तरह ज़रूरी हो।

तुम पानी भी नहीं हो,
पर पानी की तरह ज़रूरी हो।

तुम आग, मिट्टी और आसमान भी तो नहीं हो,
पर आग, मिट्टी और आसमान की तरह ज़रूरी हो।

मेरी देह के लिए प्राण हो,
हाँ,
तुम ज़रूरी हो...

ताकत — 14.12.23

ताकत — 14.12.23

उनके पास पैसे की ताकत थी,
मैं उनका कुछ उखाड़ नहीं पाया।

उनके पास भुजाओं की ताकत थी,
मैं उनका भी कुछ नहीं उखाड़ पाया।

उनके पास सत्ता की ताकत थी—
मैंने उन्हें उखाड़ फेंका।

झगड़ना 13.12.26

हाँ, हम झगड़ते हैं—
वह मेरे लिए
मुझसे झगड़ती है,
मैं उसके लिए
उससे झगड़ता हूँ...

खेल — 13.12.23

खेल — 13.12.23

हमारे साथ खेलना चाहता था बच्चा,
पर हमने उसे अपना वक्त और साथ नहीं दिया।
साथ खेलने के बजाय
उसके हाथ में देते रहे स्मार्टफोन,
हम खेलते रहे
बच्चे की भावनाओं के साथ।

अब बदल गया है बच्चों का खेल,
स्मार्टफोन की सोहबत में
स्मार्ट हो गया है बच्चा।

बड़ा हो गया है बच्चा,
अब वह रोज़ खेलता है
हमारी भावनाओं के साथ।

हाँ, हमने ही तो सिखाया था
यह खेल उसे बचपन में...!!!